इंटरनेट का इतिहास – History Of Internet In Hindi

आज दुनिया बहुत ही आधुनिक हो चुकी है और कई सालों का सफर इंसान कुछ ही घंटों में तय कर रहा है। आसान कम्युनिकेशन के जरिए दुनिया की आर्थिक व्यवस्था पिछली सदी के मुकाबले आज ज्यादा बेहतर हो गई है, वैज्ञानिकों द्वारा इसी तरह की कई रचनाएं हुई हैं जिसे दुनिया का नक्शा बदला गया लेकिन ऐसी रचना भी हुई जिसकी वजह से दुनिया का रुख ही बदल गया, इंटरनेट।

इंटरनेट ने हमारी जिंदगी को पूरी तरह से चेंज करके रख दिया है टाइम ऐसा आ गया है कि इंटरनेट के बिना आज हम अपनी जिंदगी कल्पना भी नहीं कर सकते। लेकिन क्या आपको पता है कि इंटरनेट का आविष्कार कैसे हुआ था और किसने किया था आज हम इसी के बारे में जानेंगे कि इंटरनेट का आविष्कार कैसे हुआ और किसने किया था तो आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

इंटरनेट का परिचय

इंटरनेट का फुल फॉर्म इंटरनेशनल नेटवर्क है, यह एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क है जो दो या दो से अधिक कंप्यूटर को आपस में wireless तरीके से जोड़ता है जिसके जरिए कंप्यूटर में मौजूदा जानकारी को हम एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में भेज सकते हैं तथा एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में प्राप्त कर सकते हैं चाहे कम्प्यूटर्स की दूरिया कितनी भी क्यों न हो

इंटरनेट का इतिहास – History Of Internet In Hindi

इंटरनेट का आविष्कार किसी एक समय में किसी एक इंसान के द्वारा नहीं हुआ था इसका आविष्कार और विकास पीढ़ी दर पीढ़ी हुआ और इसके अविष्कार और विकास में कई साइंटिस्टों का समय और योगदान रहा है इसकी शुरुआत सन 1962 में अमेरिका में जे.सी.आर. लिक लीडर के द्वारा हुई थी। सन 1960 के दशक में रूस और अमेरिका के बीच कोल्ड वॉर चल रहा था। अमेरिका को डर था कि रूस उसके ऊपर परमाणु हमला न कर दें इसलिए अमेरिका एक ऐसा नेटवर्क बनाना चाहता था। जिसके द्वारा वो अमेरिका के सारे कंप्यूटर को एक साथ जोड़ सके।

सन 1962 में जी.सी.आर. लिक लीडर ने एक संस्था बनाई जिसका नाम उन्होंने दी डी.अरपा. (DARPA) यानी डिफेंस एडवांस रिसर्च प्रोजेक्ट एजेंसी रखा। इस संस्था के द्वारा उन्होंने एक नेटवर्क बनाया जिसका नाम उन्होंने इंटींग्लेटिंक नेटवर्क रखा। इसका मकसद अमेरिकी डिफेंस सिस्टम की एक कंप्यूटर को दूसरे कंप्यूटर से जोड़ना था। ताकि उनके सीक्रेट मैसेज को एक जगह से दूसरी जगह तक फास्ट और सिकरेट तरीके से भेजा जा सके।

29 अक्टूबर सन 1969 को डी.अरपा. ने लॉस एंजिल्स में कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के कंप्यूटर और उससे 350 किलोमीटर दूर स्टैण्ड फॉर्ड रिसर्च इंस्टीट्यूट के कंप्यूटर के बीच दुनिया का पहला इलेक्ट्रॉनिक संदेश एल और ओ वर्ड को भेजा। जिससे स्टैंड फॉर्ड रिसर्च इंस्टीट्यूट का कंप्यूटर क्रैश हो गया। एक्चुअली वो लॉग इन भेजने का प्रयास कर रहे थे। लेकिन एल ओ भेजने के दौरान ही उनका सिस्टम क्रैश हो गया। लेकिन बाद में इसमें कुछ सुधार करने के बाद वो इसे भेजने में सफल हो गया।

फिर सन 1974 में डी.अरपा. के चीफ मेंबर विंट क्राफ्ट और रोबोट कोन ने दो कंप्यूटर को आपस में जोड़ने के लिए टी.सी.पी. यानी ट्रांसमिशन कंट्रोल प्रोटोकोल डिजाइन किया और इंटीग्लेटिंक नेटवर्क का नाम बदलकर इंटरनेट रख दिया। विंटन सर्फ और रोबोट कोन को फादर ऑफ इंटरनेट भी कहा जाता है।

लेकिन इंटरनेट बनने के बावजूद भी एक कंप्यूटर को दूसरे कंप्यूटर से कनेक्ट करना संभव नहीं था। साल 1976 में डॉ. रॉबर्ट मिल्कफ ने इथर नेट कोकशेल केबल बनाया। जिसके जरिए बहुत सारे कंप्यूटर एक दूसरे से कनेक्ट कर सकते थे और किसी भी तरीके का डाटा ट्रांसफर करना संभव हो गया। जिसे डॉ रॉबर्ट ने एक पार्टिकुलर नाम दिया लोकल एरिया नेटवर्क। यानी इन्हें इंटरनेट का आविष्कारक भी माना जाता है।

सन 1980 में माइक्रोसॉफ्ट के फाउंडर बिल गेट्स ने अपनी आई. बी. एम. कंप्यूटर्स बनाएं और अपने माइक्रोसॉफ्ट ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) में सबसे पहले इंटरनेट की सुविधा लगाई। 1 जनवरी 1983 में डी.अरपा. के चीफ मेंबर विंटन सर्फ और रोबोट कोन ने डी.अरपा. का नाम बदलकर अरपा नेट रख दिया और हर कंप्यूटर के लिए उनकी एक यूनिक आईडी बनाई जिसे आज हम आई.पी. एड्रेस (IP Address) कहते हैं। इस आई.पी. एड्रेस से हर कंप्यूटर में इंटरनेट को एक्सेस करना आसान हो गया।

अब तक इंटरनेट से सिर्फ डाटा ट्रांसफरिंग, कैलकुलेटिंग और 2 डी गेम के लिए इस्तेमाल किया जाता था। इसी साल यानी सन् 1983 में पोल मोको पेटिस ने डोमेन नेम एक्सटेंशन का आविष्कार किया। जैसे डॉट कॉम, डॉट नेट, डॉट जीओवी इसके बाद से वेबसाइटे, नाम से बनना शुरू हो गई है नहीं तो इससे पहले किसी वेबसाइट पे जाने के लिए नंबर यानी उसके आईपी ऐड्रेस का यूज किया जाता था। जैसे मान लीजिए आपको गूगल डॉट कॉम पर जाना है तो उसके लिए ब्राउज़र में आपको नंबर टाइप करना पड़ता था।

सन् 1989 में विंटन सर्फ और रोबोट कोन ने पहली आई.एस.पी यानी इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर कंपनी बनाई। जिसका नाम टेलनेट रखा। टेलनेट दुनिया की सबसे पहली इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर कंपनी थी। टेलनेट की मदद से इंटरनेट को लोगों की यूज़ के लिए दिया जाने लगा नहीं तो इससे पहले भी इंटरनेट का यूज सिर्फ डिफेंस और गवर्नमेंट एजेंसी ही करती थी। सन् 1990 में टीम बर्नर्स ली ने कंप्यूटर के लिए एच.टी.एम.एल. यानी हाइपर टेक्स्ट मल्टीपल लैंग्वेज बनाया। एच.टी.एम.एल. की मदद से इंटरनेट पर ब्राउज़र और पेज बनने लगे। जिसे वेबपेज कहा जाने लगा और इसकी मदद से इंटरनेट पर वेब साइटों को नेविगेट करना आसान हो गया। फिर सन् 1991 में टीम बर्नर्स ली ने डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू यानी वर्ल्ड वाइड वेब बनाया। जिसकी मद्द से वेबसाइटों को ढूंढना आसान हो गया। नहीं तो इससे पहले अगर आपको किसी वेबसाइट पर जाना होता था तो वो वेबसाइट जिस कंप्यूटर में है उस कंप्यूटर का आईपी ऐड्रेस याद होना जरूरी था। 

सन् 1991 के बाद इंटरनेट पर कोई भी चीज फ्री नहीं रही। सन् 1992 के बाद इंटरनेट को आसानी से यूज करने के लिए मार्केट में दो-तीन तरह की सर्च इंजन आये। जैसे याहू, बिंग। लेकिन कोई भी सही तरीके से चल नहीं पाया। अब आते हैं इंटरनेट की कामयाबी की तरफ, सन् 1995 में इंटरनेट एवरेज स्पीड 28.8 केबीपीएस थी और उस समय इंटरनेट यूज करने वालों की तादाद लगभग एक करोड़ 60 लाख थी। एक अनुमान के मुताबिक उस समय दुनिया के 0.2 प्रतिशत लोग इंटरनेट इस्तेमाल कर रहे थे। लेकिन 22 साल बाद आज 2017 में इंटरनेट की एवरेज स्पीड 5.6 एमबीपीएस है। और दुनिया में तकरीबन 360 करोड़ लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। एक अनुमान के मुताबिक दुनिया के 40 प्रतिशत लोग इंटरनेट से आज जुड़े हुए हैं और इन्हीं 22 सालों में इंटरनेट की स्पीड में 195 प्रतिशत बढ़ोत्तरी हुई है।

सन् 1999 में नेप्सन ने 18 साल की उम्र में ही वायरलेस फर्टिलिटी नेटवर्क बनाया जिसे आज हम वाईफाई कहते हैं। और इस ऑफ लाइन नेटवर्क को नेप्शन ने मोबाइल और कम्पैक्ट में बिल्ड कर इंटरनेट को बिना वायर शेयर करना संभव कर दिया। यह तो बस एक नेटवर्क की शुरुआत थी इंटरनेट की वजह से दुनिया में कई अविष्कारों ने जन्म लिया और कई खोज की गई। आज दुनिया के बड़े-बड़े बिजनेस और फाइनेंशियल सिस्टम इंटरनेट पर निर्भर हैं। एक अनुमान के मुताबिक अगर दुनिया में इंटरनेट सिर्फ 1 घंटे के लिए बंद हो जाए तो दुनिया की आर्थिक व्यवस्था को बिलयनों का नुकसान होगा और दुनिया तकरीबन 6 दिन पीछे हो जाएगी। फिर सन् 1998 में गूगल सर्च इंजन आया और इसने इंटरनेट की दुनिया में क्रांति ला दी और आज यूट्यूब, फेसबुक, व्हाट्सएप, और सोशल नेटवर्किंग साइटों ने हमारी जिंदगी को बदल कर रख दिया है। और आज समय ऐसा आ गया है कि हम इंटरनेट के बिना अपने आप को अधूरा महसूस करते हैं।

इंटरनेट के विकास को समझे इस वीडियो की मदद से

यह एक suggested youtube video है जिसमे इंटरनेट के इतिहास एवं विकास को को अच्छे से समझाया गया है:-

This Video Is embedded From TheVeb Tech Youtube Channel

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