इंटरनेट क्या है – इंटरनेट कैसे काम करता है?

इंटरनेट कई सारे कंप्यूटर का एक नेटवर्क है जिसमें जानकारियों का आदान-प्रदान होता है जानकारी हासिल करने के लिए इंटरनेट में कई सारी वेबसाइट उपलब्ध होती है पर क्या आप जानते हैं यहां इंटरनेट कैसे काम करता है और एक जगह से दूसरी जगह Data (जानकारि) कैसे ट्रांसफर होता है आज इस लेख में हम यही जानेंगे

इंटरनेट कैसे काम करता है

इंटरनेट में जब किसी व्यक्ति को किसी वेबसाइट में मौजूदा जानकारी को प्राप्त करना होता है तब वह व्यक्ति अपने कप्यूटर के ब्राउज़र में उस वेबसाइट का Domain Name दर्द करता है फिर वह Domain Name DNS Server पर जाता है फिर DNS Server उस वेबसाइट का IP Address आपके ब्राउज़र को बताता है और तब आपके ब्राउज़र आईपी एड्रेस की मदद से उस वेबसाइट तक पहुंचता है और फिर वेबसाइट TCP/IP Protocol की मदद से जानकारी को आपके वेबसाइट तक पहुँचती है

क्या आपको कुछ समझ नहीं आया?” अगर आपको  इंटरनेट की बुनियादी चीजों के बारे में जानकारी नहीं है तो यह साधारण है, इंटरनेट कैसे काम करता है यह समझना तो काफी आसान है पर इससे समझने के लिए पहले आपको इंटरनेट की कुछ बुनियादी चीजों के बारे में जानकारी होना आवश्यक है जैसे “TCP/IP, Domain Name और DNS”

इंटरनेट की कुछ बुनियादी चीजों

इंटरनेट को काम करने के लिए यह कुछ बुनियादी चीजों की जरूरत है जिके बारे में आप जान कर आसानी से समझ सकते हैं कि इंटरनेट कैसे काम करता है

  1. client and server computers
  2. TCP/IP
  3. Domain Name 
  4. DNS

client and server computers

इंटरनेट में डेटा दो या दो से अधिक कंप्यूटर के बीच ट्रांसफर होता है जिनमें से एक क्लाइंट कंप्यूटर (clint computer) होता है और दूसरा सरवर कंप्यूटर (serever computer) होता है “सरवर कंप्यूटर को सिर्फ सरवर भी कहा जाता है”

इंटरनेट में जितनी भी वेबसाइट (website) होती है वह सब एक कंप्यूटर में संग्रहित (store) होती है जिसे सरवर कंप्यूटर कहा जाता हैं और जिस कंप्यूटर, मोबाइल अन्य डिवाइस से हम उस वेबसाइट को एक्सेस करके उसका डेटा प्राप्त करते हैं उसे क्लाइंट कंप्यूटर कहते हैं

TCP/IP

TCP

टीसीपी का पूरा नाम ट्रांसमिशन कंट्रोल प्रोटोकोल (Transmission Control Protocol) है और आईपी का पूरा नाम इंटरनेट प्रोटोकॉल (Internet Protocol) है प्रोटोकॉल का अर्थ नियम होता है 

डेटा को एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर के सेंड (send) या रिसीव (recive) करा जाता है तब डेटा को ट्रांसमिट होने के लिए कुछ नियमों का पालन करना पड़ता है जिसे टीसीपी कहते हैं यह डेटा को कई छोटे-छोटे भागों में बांट देता है जिसे पैकेट्स (packets) कहते हैं यह पैकेट्स टुकड़ों में सेन्डर कंप्यूटर से रिसीवर कंप्यूटर तक ट्रांसफर होते हैं और यदि कोई पैकेट्स बीच में छूट जाए तो यह सेन्डर कंप्यूटर से फिर से सेंड हो जाता है और जब सभी पैकेट्स रिसीवर कंप्यूटर में पहुंच जाते हैं तब यह ईखट्टा होकर वह डेटा का रूप ले लेता है जिससे सेन्डर कंप्यूटर से रिसीवर कंप्यूटर में भेजा गया है

IP

इंटरनेट में डेटा ट्रांसफर टी.सी.पी की मदद से तो हो जाता है पर डेटा को सही एड्रेस याने सही कंप्यूटर पर भेजना का कार्य यह कार्य आईपी (IP) द्वारा होता है

जिस तरह सभी घर के अलग-अलग मकान नंबर होते हैं उसी तरह हर कंप्यूटर के पास अलग-अलग आईपी एड्रेस (IP Address) होता है जिसके जरिए टी.सी.पी डेटा को सही एड्रेस तक पहुंचाता है  “computer या mobile का address इस प्रकार होता है = ११.३4.2.73”

टीसीपी डेटा को व्यवस्थित रूप से ट्रांसमिट करता है और आईपी डेटा को सही एड्रेस, या ने सही कंप्यूटर तक पहुंचाने में मदद करता है इसलिए टी.सी.पी और आईपी का उपयोग इंटरनेट एक साथी ही होता है जिसे हम टीसीपी ऑब्लिक आईपी (TCP/IP) कहते हैं

Domain Name

इंटरनेट में जितनी भी वेबसाइट होती है उन सभी वेबसाइट के अलग-अलग ip address होते हैं पर व्यक्ति इतने सरे आईपी ऐड्रेस को याद नहीं रख सकता इसलिए डोमेन नेम (domain name) का आविष्कार हुआ डोमेन नेम याने वेबसाइट का नाम जैसे “hindiset.in” जिससे लोगो को बहुत सारे numbers याद रखने की जरुरत नहीं उहने बस वेबसाइट का Domain Name याद रखना होता है, क्युकी जैसे ही लोग web browser में Domain Name को सर्च करते है तो domain name और DNS के दुवारा Browser को अपने आप उस website का ip address पता चल जाता है और वह उस वेबसाइट तक पहुंच जाता है , यह सब इसलिए क्योंकी इंसान नम्बरों के मुकाबले नाम को अधिक अच्छे से याद रख सकता है

DNS

DNS नेम याने Domain Name Server, जिसे आप Domain Name System या Domain Name Service भी कह सकते हो

DNS सरवर एक ऐसा सरवर है जिसमें वेबसाइट का डोमेन नेम और आईपी ऐड्रेस व्यवस्थित रूप से संग्रहित होता है जिसकी मदद से वेबसाइट के डोमेन नेम के जरिये उसका आईपी ऐड्रेस पता लगता है

DNS को और अच्छे से समझने के लिए आप अपने मोबाइल के कांटेक्ट एप्लीकेशन को उद्धरण के तौर पर देख सकते हैं जिस तरह आपके मोबाइल में कांटेक्ट में अपने मित्र का नाम और नंबर एक साथ व्यवस्थित होता है उसी तरह DNS में भी वेबसाइट का डोमेन नेम और उसका आईपी ऐड्रेस व्यवस्थित होता है, जिस तरह आपको अपने मित्र के नाम पर क्लिक करते होतो उसके नंबर पर अपने आप कॉल लग जाता है उसी तरह DNS की मदद से डोमेन नेम को web browser में दर्ज करते ही browser को उसका आईपी एड्रेस पता लग जाता है और उस एड्रेस से वेबसाइट के सर्वर कंप्यूटर तक पहुंच कर वेबसाइट को एक्सेस करता है

सारांश

अब हमें इंटरनेट की सभी बुनियादी चीजों के बारे में जानकारी हो गई है अब हम सरलता से समझ सकते हैं कि इंटरनेट कैसे काम करता है

जब हमें इंटरनेट में किसी वेबसाइट को एक्सेस करना होता है तब हम अपने क्लाइंट कंप्यूटर से उस वेबसाइट को एक्सेस करने के उस वेबसाइट के डोमेन नेम को ब्राउज़र में दर्ज करके सर्च पर क्लिक करते है तब ब्राउज़र से डोमेन नेम DNS में जाता है और DNS उस Website के सर्वर का IP Address वेबसाइट को भेज देता है फिर ब्राउज़र ip address के जरिए उस वेबसाइट के सरवन कंप्यूटर तक पहुंचता है और सरवन को रिक्वेस्ट (request) करता है कि जानकारी भेजें और फिर server क्लाइंट कंप्यूटर को जानकारी भेज देता है

इस तरह सर्वर कंप्यूटर से आपके क्लाइंट कंप्यूटर तब डेटा पहुँचता है

इंटरनेट कैसे काम करता है यह और अच्छे समझने के लिए आप यहां सजेस्टेड वीडियो देख सकते हैं: –

यह वीडियो Lesics हिंदी यूट्यूब चैनल से Embed किया गया है 

आशा है इस लेख को पढ़ कर आप समझ गए होंगे कि इंटरनेट कैसे काम करता है और यह एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में किस तरह से डेटा को ट्रांसफर करता है यदि आपके मन में अभी भी कोई सवाल है तो आप कमेंट करके हमसे पूछ सकते हैं 

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